जादू की पुड़‍िया में आपका स्‍वागत है। चूंकि यहां जादू के बारे में ख़बरें 'कभी-भी' और 'कितनी भी' आ सकती हैं। और हो सकता है कि आप बार-बार ब्‍लॉग पर ना आ सकें। ऐसे में जादू की ख़बरें हासिल करने के लिए ई-मेल सदस्‍यता की मदद लें। ताकि 'बुलेटिन' मेल-बॉक्‍स पर ही आप तक पहुंच सके।

Thursday, May 3, 2012

जादू-बुलेटिन--लस्‍सी लस्‍सी।

अभी-अभी पापा मलाईदार लस्‍सी लाये हैं।

और जादू नीचे साइकिल चलाकर लौटा है।

मम्‍मा ने कहा, जब तक हाथ-पैर नहीं धोओगे--
और खाना नहीं खाओगे लस्‍सी नहीं मिलेगी।

(क्‍योंकि लस्सी पीने के बाद जादू खाना नहीं खाते)

पर जादू रटते रहे, मम्‍मा दे दो ना।
पीज़ (प्‍लीज़) दे दो ना।

जब देखा कि दाल नहीं गल रही है, तो ब्रह्मास्‍त्र चलाया।

मम्‍मा जादू भूखा-प्‍यासा नीचे से खेलकर आया है,
पीज़ दे दो ना।
और मम्‍मा ख़ुद को रोक नहीं पाई हैं।

................................................................

पापा और बबलू चाचा फ़ोन पर बात कर रहे थे।

पापा ने जादू से बात कराए बिना फ़ोन रख दिया।

जादू ने पापा के पास आकर बोला--

चाचा से ये क्यों नहीं बोला कि जादू उन्‍हें पटक-पटक कर मारेगा।

(ये वाक्‍य जादू और बबलू चाचा की झड़प का 'मोटो' है। )

...................................................................

एक दिन जादू से पापा ने पूछा, जादू आपको कौन-कौन से गाने

पसंद हैं। तो जादू ने कुछ इस तरह गिनाये।

जादू---'पापा जादू को पसंद है--साडा हक (रॉक-स्‍टार) 

औल...रब राखां (love break-up zindagi)
औल--पिया ले (पिया रे--तेरे नाल लव हो गया)'

पापा--और जादू और कौन सा

जादू--औल........अम्‍म्‍ममम.....'तिकनी तमेली'।

पापा-- और

जादू---तम्‍मक-त‍ल्‍लो

पापा—और

जादू--औल 'शो जा लाजकुमाली'

 

ज़रा देखिए जादू किन गानों से होते हुए सहगल तक पहुंचे हैं।

 

4 comments:

PD said...

:)

Anonymous said...

jadoo sangeet premi hai....har mood mizaz ka gana pasand hai use ....jadoo ka taste bada refined hai ....is mamle mein...ho bhi kyon na woh do annoncers ka beta hai...ghar ka sangetemay mahaul use bachpan se hi ye sanskar de raha hai...jadoo ki list mein agar tamak tallo hai to sehagal finaaly top par hi kabiz hain...gud jadoo .....- niharika lucknow...

Manish Yadav said...

जादू अब प्लेबैक सिंगर बनेगा.. और लस्सी पियेगा.. :)

हिमानी said...

ये मजेदार किस्सा है नई पीढ़ी की पसंद का...और अच्छा भी कि कहीं से भी होते हुए लेकिन अंत में सही जगह तो पहुंचे तो सही..आखिर सहगल को याद रखने के लिए किसी पीढ़ी या वक्त की जररूत है भी तो नहीं वो याद रह ही जाते हैं..

Post a Comment