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Friday, June 5, 2015

आज मम्मा उदास थी

मेरी मम्मा भी बड़ी अजीब है .......गाना बज रहा था _चल री सजनी अब क्या सोचे कजरा न बह जाये रोते रोते ...गाना सुनते हुए अचानक रोने लगीं  ...मैं चिंतित हो गया क्या करूं .....मैं उनके पास गया उनक आंसू पोंछे और उन्हें चुप कराया जैसे वे मुझे कराती हैं ..पूछने पर पता चला उन्हें अपने बाबा यानि मेरे नाना की याद आ गई  ...ये उनके पापा का फेवरेट सांग था । 

समझ नहीं पा रहा कि उनके होठों पे मुस्कान के मोती कैसे बिखेरूं .....

5 comments:

PD said...

जादू तो बम्बई का बाबू है, मुझे यकीन है मम्मा को खुश कर देगा। :)

Praksh Ingole said...

मेरे पास शब्द नही। मैं दुखी इन्सान देख नही सकता। जब अपना कोई हो तो....

Anonymous said...

कहते तो खान साहब आप हो माशा अल्‍लाह खूदा आपको यूं ही बनाए रखे

ब्लॉग बुलेटिन said...

आज की ब्लॉग बुलेटिन बांग्लादेश समझौता :- ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Jagdish Bhambhu said...

Super

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