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Thursday, January 9, 2014

पापा क्‍या मून सब लोगों के साथ साथ चलता है।

कल रात जादू पापा के साथ कहीं जा रहे थे। आसमान में चांद दिखा। जादू बोले--पापा पापा देखिए moon. moon …फिर बहुत देर तक जादू मून को देखते रहे। गाड़ी आगे बढ़ती रही। जादू बोले--पापा क्‍या ये मून सब लोगों के साथ-साथ चलता है। पापा ने बताया-- हां बेटा। अच्‍छा तो इसका मतलब जब हम घर पहुंच जायेंगे तो मैं मून को देखूंगा और हैरान रह जाऊंगा कि ये तो वही रास्‍ते वाला मून है।
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जादू ने आज दोपहर पापा से कहा, पापा आप आमिर अंकल को हमारी बिल्डिंग में बुलवाईये ना। पापा ने पूछा पर क्‍यों बेटा। जादू बोले-- पापा मैं आमिर अंकल से कहूंगा कि जैसे वो धूम-3 में बिल्डिंग से उतरते हैं--वैसे ही दीवार पर चलकर हमारी बिल्डिंग से भी उतरें।
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पापा ने पूछा, जादू आज स्‍कूल में क्‍या हुआ।
जादू ने बताया-- आज स्‍कूल में मैंने और दर्श ने एक- दूसरे को चार बार सॉरी कहा। मैंने कहा--क्‍यों, कैसे।
जादू बोले--पहली बार दर्श ने मेरी गर्दन पर चिकोटी काटी। मैंने उससे कट्टी कर ली। तो दर्श ने सॉरी कहा।
पापा-- फिर क्‍या हुआ।
जादू- फिर क्‍या फ्रैंडशिप। और क्‍या।
पापा- फिर अगला सॉरी कब हुआ।
जादू- फिर दर्श ने मुझे तड़ से मारा। मैंने कहा- दर्श सॉरी बोलो।
दर्श ने फौरन सॉरी बोल दिया।
पापा- और थर्ड सॉरी।
जादू--मैंने दर्श को मुंह पर मारा, तो वो रोया। क्‍योंकि वो मेरे साथ चल नहीं रहा था। मेरी बात नहीं मान रहा था।
पापा- फिर
जादू- फिर क्‍या, मैंने सॉरी बोल दिया और फ्रैंडशिप हो गयी।
पापा- और फोर्थ सॉरी...
जादू- फोर्थ सॉरी तो हुआ ही नहीं। सॉरी..मेरा ध्‍यान नहीं था इसलिए चार बार सॉरी कहने का बता दिया।
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बहुत दिनों बाद जादू पापा-मम्‍मा के साथ लोकल-ट्रेन से अंधेरी गये। शाम का वक्‍त था। सब दौड़-दौड़ कर ट्रेन पकड़ रहे थे। जादू हैरान रह गये--बोले..मम्मा वो देखो...लोग पता नहीं क्यों भाग रहे हैं।
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एक दिन पापा और जादू एक कुरियर ऑफिस गये।
पापा को कोई कुरियर करना था।
वहां दस पंद्रह टेबल पर लोग कुरियर का काम कर रहे थे।
जादू बोले--पापा पापा ये कौन-सा स्‍कूल है।
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8 comments:

सागर नाहर said...

आपके साथ सिर्फ मून चलता है!
हमारे साथ तो सन, मून, स्काई और स्टार भी साथ चलते हैं। :)

डा प्रवीण चोपड़ा said...

अच्छा लगा ..हमें भी जादू की बातों से बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है...बहुत अच्छे और जिस तरह से आपने पोस्ट लिखी है ..वह भी काबिले तारीफ़...जब जादू बड़ा होकर देखेगा तो बहुत खुश होगा....लिखते रहिए...और जादू की खुशी के लिए कभी कभी पोस्ट में एक तस्वीर भी लगा दिया करें... very nice!

डा प्रवीण चोपड़ा said...

अच्छा लगा ..हमें भी जादू की बातों से बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है...बहुत अच्छे और जिस तरह से आपने पोस्ट लिखी है ..वह भी काबिले तारीफ़...जब जादू बड़ा होकर देखेगा तो बहुत खुश होगा....लिखते रहिए...और जादू की खुशी के लिए कभी कभी पोस्ट में एक तस्वीर भी लगा दिया करें... very nice!

ashishdeolia said...

बचपन में हम भी बहुत दौड़े हैं चांद के साथ साथ ..... फिर वही दिन याद आ गये।

rajesh mahaver said...

येही तो जादू है बिट्टू जी:-)

rajesh mahaver said...

एक और बात.. आपके पापा भी मून की तरह हैं
एक ही साथ सब जगह के रेडियो पर होते हैं:-)

rajesh mahaver said...

येही तो जादू है बिट्टू जी:-)

Parmeshwar Sahu said...

I love your innocence Jadu..

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