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Saturday, November 3, 2012

जादू-उवाच

लहसुन खाना चाहिए....लहसुन खाने से पॉटी आती है

मोबाइल-अंकल--और सर ये रहा आपका सिम

जादू- नहीं सिम नहीं बोलते
अंकल- तो क्‍या बोलते हैं
जादू- सिम बोलते हैं सिम।

(मोबाइल अंकल कुछ नहीं समझ पाये, सिर्फ थैंक्‍यू बोले)
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मुझे पापा के ऑफिस जाना है, वहां आमिर अंकल होते हैं।

अख़बार में विज्ञापन देखकर--देखो पापा सैम-सम गैलेक्‍सी

वहां नहीं जाना--वहां कॉच-कॉच (कॉकरोच) है।

देखो मुझे खुंसी (फुंसी) हो गयी है


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पापा- (बरफी फिल्‍म देखने के बाद) जादू बेटा बरफी क्‍या करता है
जादू--बरफी सायकिल चलाता है

6 comments:

Tulika Sharma said...

:)
बचपन की मिठास

Anonymous said...

jadoo jo kahta hai sab sahi hota hai ...................isliye sab jadoo ki hi baat manenge..........-niharika

शिवम् मिश्रा said...

जो जादू बोले वो सही ... ;-)

पृथ्वीराज कपूर - आवाज अलग, अंदाज अलग... - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Archana said...

ओए! जादू फ़िर बोला ...बड़े दिनों बाद !!!गुड गुड ...

Akash Mishra said...

अगर मांग पाता खुदा से मैं कुछ भी ,
तो फिर से वो बचपन के पल मांग लाता | :)
मिठास घुली है जादू के संवाद में |

सादर

ajay yadav said...

जादू ने बचपन कि याद दिला दी ....शुक्रिया जादू !

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