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Sunday, November 6, 2011

जादू बुलेटिन

1. अभी-अभी मम्‍मा ने जादू से पूछा--आज जादू डिनर में क्‍या खायेगा।

जादू ने कहा—लड्डू

मम्‍मा--अरे बाबा खाना क्‍या खायेगा

जादू—मिठाई

मम्‍मा--मिठाई तो खाने के बाद पर खाने में क्‍या।

जादू--मम्‍मा जादू का दिल मत तोड़ो ना।

मम्‍मा-सब्‍ज़ी रोटी खायेगा जादू

जादू--जादू को पतंद नहीं है।



2. सुबह मम्‍मा ऑफिस गई थीं। पापा ने कहा जादू मिल्‍क पियेगा।
जादू--जादू मिल्‍क नहीं पियेगा। आजकल जादू मिल्‍क नहीं पीता इसलिए जादू

मोता हो गया है।



3. आज जादू पापा के साथ जा रहा था। मम्‍मा ने डांटा, जादू ऐसे मत चलो।

जादू--मम्‍मा जादू बहुत मासूम है। मत दांतो ना।



4. पापा ने गाड़ी चलाते हुए अचानक ब्रेक लगाया।

जादू ने पापा को डांटा--पापा क्‍यूं किया ऐसा। दीक से गाड़ी चलाईये।


Sunday, October 30, 2011

फुलझडियां...

उस दिन बबलू चाचा आए थे। जादू ने उनके साथ फुलझडियां जलाईं।

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Tuesday, September 6, 2011

ये जादू-वाणी है

अकसर पापा जादू की आवाज़ रिकॉर्ड करते हैं।
पर रंजन अंकल की फ़रमाईश पर जादू-वाणी की पहली पोस्‍ट।
इसके बाद किसी दिन 'जादू-दर्शन' भी आयेगा।

'जादू वाणी' की पहली पोस्‍ट में जादू कुछ कविताएं सुना रहे हैं।

'बबलू हाथी राजा लाए', 'जॉनी जॉनी', 'धोबी आया', 'लकड़ी की काठी' 
'मछली जल की रानी है'  'नानी तेरी मोरनी' वग़ैरह।
 

 

Sunday, September 4, 2011

खांसी

मम्‍मा जादू को दवा पिला रही थीं।

जादू बोले--'खांसी आ रही है इसलिए दवा पीना है'।

छाता ले लो बारिश हो रही है।

बारिश से जुड़ी जादू की ताज़ा बातें।

 

1. अभी अभी मौसी से बातें हो रही थीं फोन पर।

मौसी ने कविता सुनाने को कहा।

जादू बोले--'मतनी (मछली) जल की रानी है। जीवन उशका पानी है।'

तभी बारिश शुरू हो गयी।

कविता बंद और जादू फटाक से बोले--'छाता ले लो बारिश हो रही है'।

 

2. कल बारिश हो रही थी। जादू खिड़की पर पहुंचे और बोले--ऐ बारिश।

पानी पी लेना। भीगना मत। चलो जाओ। मम्‍मा बुला रही है।

 

 

3. पापा कहीं बाहर गए थे। बारिश हो रही थी। जादू खिड़की पर लाकर बोले--

'पापा जल्‍दी आना। भीगना मत। ठीक है। ओके। सुना।'

जादू को लगता है कि खिड़की पर खड़े होकर बोलने से सब सुन लेते हैं।

Sunday, August 21, 2011

भारत माता की जय

अन्‍ना हज़ारे के अनशन की वजह से टीवी पर ख़बरों में अकसर

'भारत माता की जय' सुनाई पड़ता है।
और जादू भी आजकल दिन भर 'भारत माता की जय' बोलता रहता है।

संभाल के

जादू हमेशा साहसिक करतब करता है।

आज दोपहर गाव-तकिए पर खड़े होकर 'वन-टू-थ्री' कर रहा था।

मम्‍मा से बोला, मम्‍मा संभाल के, जादू नहीं गिरेगा।
इसी तरह बेड पर जंप करते वक्‍त भी यही बोलता है।

सोफे़ से भी।

मम्‍मा बोलती हैं, बेटा संभलना मम्‍मा को नहीं आपको है।
पर जादू की समझाईश जारी रहती है,

मम्‍मा संभालके। सुनिए। संभालके जादू नहीं गिरेगा।

आवाज़ कट रही है।

जादू पापा की टेबल पर लैंड-लाइन फोन से खेल रहा था।

हैलो--सविता, हां, आवाज़ नहीं आ रही है।
अरे आवाज़ कट रही है।

जादू को भी पता है कि मौसी के फ़ोन से अकसर आवाज़ नहीं आती।

नेटवर्क गड़बड़ रहता है।

चलो सब्‍ज़ी खाओ

डॉक्‍टर अंकल  (डॉ. देवांग शाह) ने जादू को समझाया था--
तुम्‍हें सब्जियां भी खानी चाहिए।

आज पापा खाना खा रहे थे तो जादू ने पापा से कहा,

पापा डॉक्‍टर अंकल ने कहा है, सब्जियां भी खानी चाहिए।
चलो सब्‍ज़ी खाओ।
पापा ने कहा, डॉक्‍टर अंकल ने तो तुमसे कहा था ना।

जादू के आगे किसकी चलती है। सब्‍ज़ी पापा ने खाई।
जादू ने नहीं।

नईं बोलो।

कल मम्‍मा ने कहा, ये चादर बदल देना चाहिए।
जादू ने मम्‍मा से कहा--'नईं मम्‍मा चादर नहीं बोलो'।
अब मम्‍मा सोच में हैं कि चादर को चादर ना बोलें तो क्‍या बोलें।