जादू को अच्छी तरह पता है कि
कब पापा घुमाने ले जायेंगे
और कब वो जल्दी में हैं।
आज जब पापा नहाकर आए
और तैयार हो रहे थे तो जादू बालकनी पर खड़ा
birds देख रहा था।
पापा को देखकर जादू बोला--पापा टा-टा।
पापा को जादू पर बहुत प्यार आया।
नन्हे जादू का अपना t w i t t e r.
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जादू को अच्छी तरह पता है कि
कब पापा घुमाने ले जायेंगे
और कब वो जल्दी में हैं।
आज जब पापा नहाकर आए
और तैयार हो रहे थे तो जादू बालकनी पर खड़ा
birds देख रहा था।
पापा को देखकर जादू बोला--पापा टा-टा।
पापा को जादू पर बहुत प्यार आया।
जब भी पापा मम्मा को 'पिक-अप' करने ऑफिस जाते हैं,
और जादू साथ होता है
तो सीधे घर आना मुमकिन नहीं।
क्योंकि गाड़ी जैसे ही ऑफिस से लेफ्ट मुड़ती है
जादू उछलने लगते हैं
और कहते हैं इस तरफ़ नहीं, उस तरफ़ चलो।
अकसर जॉगर्स पार्क या बाज़ार या पेप्सी ग्राउंड जैसी जगहों पर
'हाजि़री' बजाकर ही घर लौटा जा सकता है।
आजकल जादू ने कुछ नई ट्रिक्स सीखी हैं।
जब भी कहीं हल्की-सी भी चोट लग जाए, जिसके बारे में
मम्मा कहतीं हैं कि चींटी ने पैर मारा है..
तो भी जादू कहते हैं---'ऊ ऊ ऊ दब्बा दब्बा' (दवा दवा)
फिर मम्मा जादू को बोरोलीन या नीविया या फिर
नारियल का तेल जो भी सामने दिख जाए लगा देती हैं।
बस जादू का (नकली) दर्द ख़त्म हो जाता है।
दूसरी ट्रिक
अगर जादू कहीं गिर जाता है, तो उस जगह की पिटाई होती है।
हॉल, बेडरूम, सीढ़ी, लिफ्ट, बिल्डिंग के मैदान, पापा-मम्मा के स्टूडियो,
दीवारों, गाड़ी के दरवाज़े सबकी पिटाई कर चुके हैं जादू जी।
तीसरी ट्रिक
मान लीजिए कि जादू को चोट लग गयी है।
हल्की फुल्की चोट।
और पापा-मम्मा कुछ दूर खड़े हैं या बैठे हैं।
तो वहीं से फूंक मार देते हैं।
जादू का दर्द ख़त्म हो जाता है।
आजकल जादू पैनी निगाहों से मम्मा को देखता रहता है।
और जैसे ही मम्मा को--
1. दवा निकालते देखता है
2. खाना परोसते देखता है
3. (बदलने के लिए) जादू के कपड़े तैयार करते देखता है
4. या कोई भी ऐसा काम करते देखता है--जो उसे झंझट लगे
तो फ़ौरन भागकर हॉल या बेडरूम में पर्दे के पीछे जाकर
कुछ यूं छिपता है कि पता ही ना चले।
कई बार मम्मा को धोखा हुआ कि जादू गया कहां।
पर आजकल मम्मा समझ गयीं हैं।
और जादू को हमेशा पर्दे के पीछे से ही पकड़ लिया जाता है।
लेकिन बदमाश जादू मम्मा को देखते ही पर्दे के पीछे से फुर्ती से
निकल कर छिपने की दूसरी जगह ढूंढता हुआ भाग निकलता है।
घर में मम्मा और जादू का 'पकड़ा-पकड़ी' या 'चूहा-बिल्ली' का खेल
चलता रहता है।
लगता है जादू पर भी वर्ल्ड कप फाइनल का असर चढ़ गया है।
आज पापा ने जादू से कहा बोलो बेटा 'इंडिया'।
और बस उसके बाद पूरी शाम जादू रटता रहा--'इंडिया इंडिया इंडिया'।
अब बताईये भला कि जब जादू हो तो कल इंडिया क्यों ना जीते।
आज जादू ने मम्मा की चूडियों का पूरा का पूरा सेट
ज़ोर से फेंक दिया।
चूडियां यहां-वहां बिखर गयीं। (मेटल की थीं, टूटी नहीं)
मम्मा को ग़ुस्सा आने ही वाला था कि
जादू ने दोनों कान पकड़े और बोला--'थॉली मम्मा' (सॉरी मम्मा)
ग़ुस्सा ख़त्म और प्यार शुरू।
मम्मा ने जादू को गोद में लेकर बहुत प्यार किया।
बदमाश जादू।
आजकल जादू हर शब्द का संस्कृत रूप बोलता है।
और ये बात उसे किसी ने सिखाई नहीं है।
उसने अपने आप 'पानी' को 'पानीयम्' या 'पानम्'
और 'छिच्छी' को 'छिच्छीयम्' बोलना शुरू कर दिया है।
कुछ और मिसालें---'बिच्चीयम' (बिस्किट के लिए) । 'पेपरम्'। वग़ैरह।
आज जादू दोपहर तक पापा के साथ है।
शरारतों से पूरा घर सिर पर ले रखा है जादू ने।
अभी-अभी आज का अख़बार किचन की 'सिंक' में फेंक आया है।
अरे भई 'भारत-पाक' सेमीफायनल के दिन
पेपर का क्या काम।
सही तो किया जादू ने।